दफन हो जायेंगी यादें ज़हन की कब्र में,
इन यादों को कफन तो पहना दो ज़रा ।
कोशिश तो करेंगें यादें जीएँ न दोबारा,
तुम भी हमें कोई तदबीर सुझा दो ज़रा ।
दिल बार-बार सोचता है तुम्हारे लिये क्यों,
तुम्ही इस बात की वज़ह समझा दो ज़रा ।
वीरानीयों ने बार-बार सदा दी बहारों के लिये,
कब तलक आओगे तुम ये बता दो ज़रा ।
Thursday, December 20, 2007
Thursday, December 13, 2007
गज़ल!
कब तक खुद से दिल की बात छुपाओगी,
खुद भी तड़पोगी और हमें भी सताओगी ।
इश्क वो चिंगारी है जो बुझाने से न बुझे,
जो आग लग चुकी है, उसे कैसे बुझाओगी ।
दास्तान-ए-दिल बहुत लम्बी हो चुकी है,
यूँ ही चुप रहोगी तो कहो कैसे सुनाओगी ।
रोज़-रोज़ का मिलना बन चुका होगा आदत,
अब इस आदत को बोलो कैसे छुड़ाओगी ।
जुड़ तो चुका ही है मेरा नाम तेरे नाम के साथ,
अब इस नाम से खुद को कैसे बचाओगी ।
खुद भी तड़पोगी और हमें भी सताओगी ।
इश्क वो चिंगारी है जो बुझाने से न बुझे,
जो आग लग चुकी है, उसे कैसे बुझाओगी ।
दास्तान-ए-दिल बहुत लम्बी हो चुकी है,
यूँ ही चुप रहोगी तो कहो कैसे सुनाओगी ।
रोज़-रोज़ का मिलना बन चुका होगा आदत,
अब इस आदत को बोलो कैसे छुड़ाओगी ।
जुड़ तो चुका ही है मेरा नाम तेरे नाम के साथ,
अब इस नाम से खुद को कैसे बचाओगी ।
Thursday, December 6, 2007
गज़ल!
ताउम्र नहीं भूल पाऊँगा तुम्हे,
तेरी बेवफाई याद आती रहेगी हमें ।
दो अश्क बहाने से फायदा क्या है,
ग़म की मार तो खाती रहेगी हमें ।
बार-बार इल्तज़ा की, बार-बार ठुकरा दिया,
यही बात तो सताती रहेगी हमें ।
दिल का आईना चटक के चूर-चूर हुआ,
तस्वीर हर टुकड़े में नज़र आती रहेगी हमें ।
इक कली ही तो माँगी थी गुलशन से हमने,
जाने क्यों तकदीर काँटे चुभाती रहेगी हमें ।
तेरी बेवफाई याद आती रहेगी हमें ।
दो अश्क बहाने से फायदा क्या है,
ग़म की मार तो खाती रहेगी हमें ।
बार-बार इल्तज़ा की, बार-बार ठुकरा दिया,
यही बात तो सताती रहेगी हमें ।
दिल का आईना चटक के चूर-चूर हुआ,
तस्वीर हर टुकड़े में नज़र आती रहेगी हमें ।
इक कली ही तो माँगी थी गुलशन से हमने,
जाने क्यों तकदीर काँटे चुभाती रहेगी हमें ।
Wednesday, December 5, 2007
गज़ल!
क्या ज़रूरत है बेवफाई का सबब जानने की,
ग़र वो प्यार न करें, तो उनसे प्यार माँगने की ।
दर्दे-दिल उनका दिया दिल में ही रहने दो,
उनकी मंशा नहीं है मेरा दर्द बाँटने की ।
दो लफ्ज़ भी ग़र कह देते अपनी ज़ुबाँ से वो,
वजह मिल जाती हमें हयात काटने की ।
दिल तो हमने ही दिया है बिन माँगे उनको,
फिर तकलीफ क्यों हो हमें दिल हारने की ।
बेशक न रखते वो मेरा दिल अपने पास,
पर तदबीर तो न करते वो हमें मारने की ।
ग़र वो प्यार न करें, तो उनसे प्यार माँगने की ।
दर्दे-दिल उनका दिया दिल में ही रहने दो,
उनकी मंशा नहीं है मेरा दर्द बाँटने की ।
दो लफ्ज़ भी ग़र कह देते अपनी ज़ुबाँ से वो,
वजह मिल जाती हमें हयात काटने की ।
दिल तो हमने ही दिया है बिन माँगे उनको,
फिर तकलीफ क्यों हो हमें दिल हारने की ।
बेशक न रखते वो मेरा दिल अपने पास,
पर तदबीर तो न करते वो हमें मारने की ।
Monday, December 3, 2007
अधूरा सपना!
एक अधूरा सपना था,
सपने में कोई अपना था,
वो आये तो टूटा सपना था,
पूरा जो होना सपना था !
हर भाव तेरे शीशे की तरह,
बस मेरा चेहरा दिखता था,
तुम लाख करो कोशिश अपनी,
हर बात में तेरी मैं ही था !
चुपचाप रहो चाहे जब तक,
नयनों की भाषा बोलेगी,
ये प्यार की मस्ती ऐसी है,
सब गाँठें खुद ही खोलेगी !
तेरा आना ज्यों सपना था,
पर मन का ये ही कहना था,
आओ सच में या ख्वाबों में,
तुमसे ही जीवन अपना था !
सपने में कोई अपना था,
वो आये तो टूटा सपना था,
पूरा जो होना सपना था !
हर भाव तेरे शीशे की तरह,
बस मेरा चेहरा दिखता था,
तुम लाख करो कोशिश अपनी,
हर बात में तेरी मैं ही था !
चुपचाप रहो चाहे जब तक,
नयनों की भाषा बोलेगी,
ये प्यार की मस्ती ऐसी है,
सब गाँठें खुद ही खोलेगी !
तेरा आना ज्यों सपना था,
पर मन का ये ही कहना था,
आओ सच में या ख्वाबों में,
तुमसे ही जीवन अपना था !
Subscribe to:
Comments (Atom)
