दिल की बातें, दिल ही जाने,
और कोई तो जाने ना,
प्यार की भाषा मन पहचाने,
और कोई पहचाने ना ।
उनके तन की खुशबू आती,
मीठी पवन जब अंगना आती,
साथ में उनकी यादें लाती,
मेरे मन को जो तड़पातीं,
कोई रोके पागल मन को,
मेरी बात तो माने ना ।
सीधा-सादा इँसा था मैं,
हरदम खुश था, हँसता था मैं,
जाने क्यों वीरानी लगें अब,
जिन राहों पर चलता था मैं,
कैसे पाऊँ फिर से खुशियाँ,
मन तो ये अब जाने ना ।
खोज रहा हूँ बस उस पल को,
खोई खुशियाँ जो लौटा दे,
जिससे खोलूँ दिल की बातें,
कोई वो भाषा समझा दे,
समझूँ मैं दुनिया की बातें,
पागल मन पहचाने ना ।

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