बड़ी छोटी रही तेरे ख्वाबों की रात,
आँख फिर से लगे तो बने कोई बात ।
दिल ने दिल से था वादा किया बार-बार,
ग़र मिल जायें वो अपनी कह दूंगा बात ।
सोचता ही रहा, देखता ही रहा,
उनके आने से भूला था सारी मैं बात ।
फिर से बुनने लगा ताने-बाने ये दिल,
ख्वाब में उनसे सारी कह लूँगा मैं बात ।
नींद आये अगर, ख्वाब आयें मुझे,
करवटें लेते थी कट जाती सारी ही रात ।
यूँ तड़पता नहीं, यूँ मचलता नहीं,
दिल ने मानी जो होती कभी मेरी बात ।
Wednesday, November 28, 2007
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2 comments:
सीधे साधे शब्दों में दिल की बात हर शेर में.
बहुत उम्दा लिखा है आपने.
बधाई
नीरज
धन्यवाद नीरज जी!
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